विदिशा के राजमाता विजयाराजे सिंधिया शासकीय कन्या (अग्रणी) स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी पखवाड़े के तहत कविता और पुस्तकों का संगम देखने को मिला। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर आयोजित कवि सम्मेलन में छह रचनाकारों ने अलग-अलग विधाओं की रचनाएं सुनाईं।
दिनकर की कविता से शुरू हुआ सम्मेलन
कार्यक्रम की शुरुआत छात्रा सुनेहा ने रामधारी सिंह दिनकर की कविता के पाठ से की। प्राचार्य डॉ. बीडी अहिरवार ने दिनकर को जनप्रतिबद्ध कवि बताते हुए कहा कि उनकी कविता ने समाज और राजनीति को दिशा दिखाने का काम किया।
खास बातें
- छह रचनाकारों ने किया काव्य पाठ
- सुनेहा ने दिनकर की कविता से की शुरुआत
- हिंदी और भारतीय ज्ञान परंपरा की पुस्तकें प्रदर्शित
सम्मेलन में डॉ. मणिमोहन मेहता, डॉ. वनिता बाजपेयी, सुदिन श्रीवास्तव, राजेंद्र श्रीवास्तव, ब्रज श्रीवास्तव और उर्वशी सक्सेना ने काव्य पाठ किया। प्रस्तुतियों में जीवन-दर्शन के साथ श्रोताओं में उत्साह जगाने वाली रचनाएं भी शामिल रहीं।
बाल कविता से गजल तक की प्रस्तुति
राजेंद्र श्रीवास्तव ने बाल कविता से छात्राओं का मनोरंजन किया। डॉ. वनिता बाजपेयी और सुदिन श्रीवास्तव ने गीत और गजलें सुनाईं, जबकि डॉ. मणिमोहन मेहता और ब्रज श्रीवास्तव ने आधुनिक कविता से सभा को परिचित कराया। उर्वशी सक्सेना की कविताएं सामयिक विषयों पर केंद्रित रहीं।
हिंदी पुस्तकों की प्रदर्शनी भी लगी
इसी दिन महाविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा और हिंदी साहित्य से जुड़ी पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाई गई। अतिथियों ने प्रदर्शित पुस्तकों की सराहना की।
हिंदी विभाग और भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ ने कार्यक्रम आयोजित किया। संचालन और संयोजन प्रो. अस्मुरारी नंदन मिश्र ने किया, जबकि प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. राजुला अल्बर्ट ने आभार व्यक्त किया; आयोजन में महाविद्यालय के स्टाफ ने सहयोग दिया।





