उज्जैन की वेधशाला में सम्राट यंत्र की सीढ़ी पर पड़ती छाया से समय पढ़ा जाता है। वह कलाई की घड़ी से अलग हो सकता है, क्योंकि छाया स्थानीय आकाश पढ़ती है और घड़ी पूरे देश का साझा मानक।
स्थानीय दोपहर
सम्राट यंत्र की ढलान पृथ्वी की धुरी के समानांतर रखी गई है। छाया की चाल सूर्य की स्थानीय स्थिति बताती है। स्थानीय दोपहर तब होती है जब सूर्य उस जगह के आकाश में सबसे ऊँचा हो।
भारतीय मानक समय एक चुने देशांतर पर आधारित है। उज्जैन की छाया से मिली संख्या को उस मानक में बदलने के लिए देशांतर का अंतर और समय-सुधार तालिका जोड़नी होती है।
नाड़ीवलय यंत्र के उत्तरी और दक्षिणी फलक अलग मौसम में रोशन होते हैं।
मुख्य बातें
- सम्राट यंत्र की ढलान पृथ्वी की धुरी के समानांतर है।
- छाया स्थानीय सूर्य-समय बताती है, जबकि घड़ी साझा मानक समय।
स्रोत और संदर्भ
- District Ujjain, Government of Madhya Pradesh · Observatory ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन · Charting the Shadows of Time: Sundial at VSSC Space Museum ↗17 दिसंबर 2024
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 16 सितंबर 2026।



